मामला गांव फाजिलपुर स्थित श्मशान घाट के जीर्णोद्धार और नवीनीकरण से जुड़ा है। काम पूरा होने के बाद ठेकेदार की करीब 23 लाख रुपये की भुगतान राशि लंबित थी। आरोप है कि इस बिल को पास कराने के बदले चार प्रतिशत कमीशन की मांग की गई, जो करीब 92 हजार रुपये बैठती थी।
शिकायत के मुताबिक, बिल पास कराने के लिए ठेकेदार ने पहले कथित तौर पर 80 हजार रुपये की रकम दे दी थी। इसके बाद 12 हजार रुपये और देने का दबाव बनाया जा रहा था। आरोप है कि इसी रकम की मांग से परेशान होकर ठेकेदार ने एसीबी का दरवाजा खटखटाया।शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने जाल बिछाया और 18 सितंबर को नगर निगम कार्यालय में कार्रवाई करते हुए कंप्यूटर ऑपरेटर को 12 हजार रुपये लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।
एसीबी की जांच में अब बिल की पूरी फाइल और उससे जुड़े अधिकारियों की भूमिका पर फोकस है।बताया जा रहा है कि ठेकेदार की बिल फाइल जेई और एसडीओ स्तर से आगे बढ़ा दी गई थी, लेकिन इसके बाद फाइल कार्यकारी अभियंता के स्तर पर कई दिनों तक लंबित रही। इसी दौरान भुगतान को लेकर ठेकेदार और अधिकारी के बीच कथित तौर पर विवाद भी हुआ।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसने चार प्रतिशत कमीशन देने पर आपत्ति जताई थी। इसके बावजूद कथित तौर पर यह स्पष्ट कर दिया गया कि रकम दिए बिना बिल पास नहीं होगा। इसके बाद ही ठेकेदार ने एसीबी से संपर्क किया।
जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि 92 हजार रुपये की कथित मांग के पीछे वास्तव में कौन-कौन लोग शामिल थे और रिश्वत की रकम का संभावित हिस्सा किस तक पहुंचना था।
एसीबी की टीम संबंधित बिल की फाइल, कार्यालयी रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और कॉल डिटेल समेत अन्य तथ्यों को खंगाल रही है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि गिरफ्तार कंप्यूटर ऑपरेटर की भूमिका केवल रकम लेने तक सीमित थी या इस पूरी प्रक्रिया में निगम के अन्य अधिकारियों की भी कोई भूमिका थी।
वहीं, कंप्यूटर ऑपरेटर की गिरफ्तारी के बाद जांच के घेरे में आए कुछ निगम अधिकारियों के कार्यालय में मौजूद नहीं होने की भी बात सामने आ रही है। आरोप है कि कुछ अधिकारी छुट्टी पर चले गए हैं और उनके मोबाइल फोन भी बंद बताए जा रहे हैं। हालांकि, इन अधिकारियों की अनुपस्थिति और मामले में उनकी वास्तविक भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
फिलहाल एसीबी की कार्रवाई के बाद नगर निगम में चर्चाओं का दौर तेज है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच एजेंसी की पड़ताल में आगे क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या इस मामले में गिरफ्तार कंप्यूटर ऑपरेटर के बाद निगम के किसी अन्य अधिकारी के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई होती है।






