Gurugram- हरियाणा के गुरुग्राम से जुड़ी डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने छह राज्यों में राज्यपालों की नियुक्ति और फेरबदल किया है। इसी क्रम में डॉ. सुधा यादव को कर्नाटक की जिम्मेदारी सौंपी गई है। भाजपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड की सदस्य रह चुकीं सुधा यादव की इस नियुक्ति को उनके लंबे राजनीतिक अनुभव और संगठन में योगदान के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
डॉ. सुधा यादव की पहचान केवल एक राजनेता के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला के रूप में भी है, जिन्होंने निजी जीवन के कठिन दौर से निकलकर सार्वजनिक जीवन में अपनी अलग पहचान बनाई। उनके पति सुखबीर सिंह यादव सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ में डिप्टी कमांडेंट थे। वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान उन्होंने देश की रक्षा करते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। पति के शहीद होने के बाद सुधा यादव ने राजनीति में कदम रखा और जनसेवा का रास्ता चुना।
सुधा यादव ने वर्ष 1999 में हरियाणा की महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा। इस चुनाव में उन्होंने अहीरवाल के प्रभावशाली नेता राव इंद्रजीत सिंह को हराकर संसद में अपनी जगह बनाई। उनकी इस जीत ने प्रदेश की राजनीति में उन्हें एक मजबूत पहचान दिलाई। बताया जाता है कि उस समय हरियाणा में भाजपा के प्रभारी रहे नरेंद्र मोदी के आग्रह पर उन्होंने राजनीति में आने का फैसला किया था।
लोकसभा में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद वर्ष 2004 में सुधा यादव को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का सदस्य बनाया गया। इसके बाद भी पार्टी संगठन में उनकी भूमिका लगातार बढ़ती रही। वर्ष 2022 में उन्हें भाजपा के केंद्रीय संसदीय बोर्ड में शामिल किया गया। वह पार्टी के केंद्रीय चुनाव संबंधी निर्णय लेने वाली महत्वपूर्ण समितियों में भी अपनी भूमिका निभा चुकी हैं। भाजपा के सर्वोच्च संगठनात्मक निकायों में जगह बनाने वाली महिलाओं में उनका नाम प्रमुखता से लिया जाता है।
राजनीतिक उपलब्धियों के साथ-साथ डॉ. सुधा यादव का शैक्षणिक सफर भी उल्लेखनीय रहा है। मूल रूप से रेवाड़ी की रहने वाली सुधा यादव ने वर्ष 1987 में आईआईटी रुड़की से रसायन विज्ञान में एमएससी की डिग्री हासिल की और वर्ष 1992 में इसी विषय में पीएचडी पूरी की। उन्हें प्रेसिडेंट गाइड अवॉर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है।
अब कर्नाटक के राज्यपाल के रूप में उनकी नई जिम्मेदारी उनके सार्वजनिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। कारगिल युद्ध में पति की शहादत के बाद राजनीति में प्रवेश करने से लेकर संसद, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और भाजपा के शीर्ष संगठनात्मक मंचों तक पहुंचने वाली डॉ. सुधा यादव के सफर में अब एक और बड़ी संवैधानिक जिम्मेदारी जुड़ गई है।






