Gurugram- निगमायुक्त प्रदीप दहिया की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में एमसीजी की बागवानी शाखा ने वित्त वर्ष 2024-25 से वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान किए गए कार्यों और पर्यावरणीय प्रभाव का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत किया है। इसके अनुसार, इन तीन वित्तीय वर्षों में बागवानी से संबंधित विभिन्न कार्यों के लिए कुल 247.13 करोड़ रुपए की वित्तीय स्वीकृतियां हुई हैं। इनमें तालाबों का पुनर्जीवन, वर्षा जल संचयन, पार्कों एवं ग्रीन बेल्ट का विकास, उपचारित जल की पाइपलाइन और मशीनरी व मशीनीकरण से जुड़े कार्य शामिल हैं।

अधिकारियों ने बताया कि वित्त वर्ष 2024-25 में 23.67 करोड रुपए़, वित्त वर्ष 2025-26 में 165.73 करोड़ रुपए तथा वित्त वर्ष 2026-27 में सितंबर 2026 तक 57.73 करोड़ रुपए की स्वीकृतियां हुई। यह बागवानी शाखा के कार्यों में जल संरक्षण, हरित क्षेत्रों के विकास और परिचालन क्षमता बढ़ाने पर दिए जा रहे कार्यों को दर्शाता है।

*113 नगर निगम तालाबों के संरक्षण और विकास पर जोर*

नगर निगम की सीमा में कुल 140 तालाबों की पहचान की गई, जिनमें से 113 तालाब नगर निगम के स्वामित्व में हैं। पहले 74 तालाबों की पहचान दर्ज थी, जिसे विस्तृत सर्वे के बाद बढ़ाकर 140 किया गया। इन 113 तालाबों में से 32 का विकास कार्य पूरा हो चुका है, 21 पर विकास कार्य जारी है और 60 तालाबों का विकास किया जाना शेष है। पहले 30 तालाबों के विकास का लक्ष्य दिसंबर 2027 और अन्य 30 तालाबों के विकास का लक्ष्य दिसंबर 2028 तक रखा गया है। सभी तालाबों का विवरण पीडीएमएस पोर्टल पर अपडेट किया गया है। निगमायुक्त ने कहा कि जिन तालाबों पर अतिक्रमण संबंधी समस्याएं हैं, उसे दूर किया जाए। तालाबों के सीमांकन के लिए ड्रोन सर्वे कराएं। 

*वर्षा जल संचयन के लिए 277 मॉड्यूलर संरचनाएं स्वीकृत*

वर्षा जल संचयन के क्षेत्र में 277 मॉड्यूलर रेनवॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाओं को मंजूरी दी गई है। इनके लिए 43.44 करोड़ की प्रशासनिक स्वीकृति है। समीक्षा में बताया गया कि 145 संरचनाएं पूरी और 81 निर्माणाधीन हैं। इन संरचनाओं की कुल स्वीकृत क्षमता 19,420 घन मीटर है, जो लगभग 194.20 लाख लीटर के बराबर है। इसके अतिरिक्त, 10 सोक पिट के लिए मामला तकनीकी स्वीकृति के चरण में है। पारंपरिक वर्षा जल संचयन संरचनाओं के रखरखाव और पुनर्सक्रियकरण के अंतर्गत कुल 443 संरचनाओं है। इनमें नगर निगम की 391 संरचनाएं, सरकारी स्कूलों की 17 संरचनाएं और 35 नई संरचनाएं शामिल हैं।

*पार्कों में उपचारित जल के उपयोग के लिए 49.80 किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क*

पार्कों में सिंचाई के लिए ताजे पानी पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से उपचारित अपशिष्ट जल के उपयोग से संबंधित नेटवर्क के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया कि वर्तमान में कुल 49.80 किलोमीटर पाइपलाइन नेटवर्क के माध्यम से 142 पार्कों को उपचारित जल उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसमें नगर निगम के माइक्रो एसटीपी से जुड़ी 16.5 किलोमीटर पाइपलाइन द्वारा 33 पार्कों और जीएमडीए की एसटीपी लाइनों से जुड़ी 33.3 किलोमीटर पाइपलाइन द्वारा 109 पार्कों को कवर किया गया है। 

प्रस्तावित विस्तार के तहत 55.15 किलोमीटर अतिरिक्त पाइपलाइन बिछाने और 170 पार्कों को जोडऩे की योजना है। इसके पूरा होने पर कुल नेटवर्क की लंबाई 104.95 किलोमीटर और कवरेज 312 पार्कों तक पहुंचने का अनुमान है। इस विस्तार से प्रतिवर्ष लगभग 1,138.8 मिलियन लीटर ताजे पानी के संभावित प्रतिस्थापन का अनुमान है। यह लक्ष्य प्रस्तावित नेटवर्क के चालू होने, जल की उपलब्धता और वास्तविक उपयोग पर निर्भर करेगा।

*49 माइक्रो एसटीपी में से 44 चालू*

नगर निगम क्षेत्र में 49 माइक्रो सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट स्थापित किए गए हैं। इनमें से 44 चालू और पांच गैर-कार्यशील हैं। इन 44 इकाइयों की कुल क्षमता 2,025 किलोलीटर प्रतिदिन है। इन संयंत्रों से उपचारित जल का उपयोग पार्कों में सिंचाई और छिडक़ाव जैसे गैर-पेयजल कार्यों के लिए किया जाता है। 

*पार्कों, ग्रीन बेल्ट और सैंट्रल वर्ज का विकास*

नगर निगम की बागवानी शाखा के अंतर्गत 1,447 पार्क, 31 ग्रीन बेल्ट और 12 सैंट्रल वर्ज हैं। पार्कों, ग्रीन बेल्ट और सैंट्रल वर्ज से संबंधित कार्यों के लिए वित्त वर्ष 2024-25 में 13.32 करोड रुपए, वित्त वर्ष 2025-26 में 86.98 करोड़ रुपए और वित्त वर्ष 2026-27 में सितंबर 2026 तक 22.01 करोड़ रुपए की स्वीकृतियां दी गई हैं। पार्कों और ग्रीन बेल्ट से जुड़े कार्यों के लिए वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 78 प्रतिशत भौतिक प्रगति और 65 प्रतिशत वित्तीय प्रगति है। वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भौतिक प्रगति 81.88 प्रतिशत और वित्तीय प्रगति 49.99 प्रतिशत है।

*पौधरोपण अभियान में झाड़ीनुमा पौधे और पेड़ों के लक्ष्य*

शहरी हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 के पौधरोपण के अनुसार, नगर निगम ने चार लाख झाड़ीनुमा पौधे लगाने का लक्ष्य रखा था और चार लाख लगाए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, कैच फाउंडेशन द्वारा गांव बंधवाड़ी में 2,750 झाड़ीनुमा पौधे लगाए गए है। पेड़ों के संबंध में 66,000 का लक्ष्य लिया गया था, जिसमें से 39,500 पेड़ एमसीजी द्वारा और 25,000 पेड़ वन विभाग द्वारा लगाए गए हैं, जिसके लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र प्रदान किया गया है। इसके अतिरिक्त, कैच फाउंडेशन द्वारा गांव बंधवाड़ी में 1,350 पौधे लगाए गए हैं।

*आधुनिक मशीनरी से कार्यों की परिचालन क्षमता बढ़ाने पर जोर*

बागवानी शाखा में वित्त वर्ष 2025-26 में 10 ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन, 40 ट्रैक्टर, 40 ट्रेलर, आठ ट्री-प्रूनिंग प्लेटफॉर्म और 40 श्रेडर की खरीद की गई है। इस खरीद के बाद ट्रैक्टरों की संख्या नौ से बढक़र 49, श्रेडर चार से बढक़र 44 और ट्री-प्रूनिंग प्लेटफॉर्म सात से बढक़र 15 हो गए हैं। ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन की संख्या शून्य से बढक़र 10 की गई है। इसके अतिरिक्त, नौ सीएनजी ट्रक-माउंटेड एंटी-स्मॉग गन और दो रोड वॉशर के लिए अलग से कार्यादेश जारी किया गया है। इन संसाधनों का उद्देश्य धूल नियंत्रण, पेड़ों की छंटाई, बागवानी अपशिष्ट के प्रसंस्करण और फील्ड स्तर पर कार्यों की क्षमता को मजबूत करना है।

निगमायुक्त ने कहा कि एमसीजी का उद्देश्य शहर में हरित क्षेत्रों का विस्तार करने के साथ-साथ संसाधनों का संरक्षण और उनका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है। तालाबों का पुर्नजीवन, वर्षा जल संचयन संरचनाओं का विकास, पार्कों में उपचारित जल का उपयोग और आधुनिक मशीनरी के माध्यम से बागवानी कार्यों को अधिक प्रभावी बनाया जा रहा है। इन प्रयासों से जल संरक्षण, पर्यावरण सुधार और गुरुग्राम को स्वच्छ एवं हरित शहर बनाने की दिशा में मदद मिलेगी।