Gurugram- गुरुग्राम में अपने घर में रहना भी अब लोगों के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा है। कहीं पड़ोसी प्लॉट में चल रही खुदाई मकान को खतरे में डाल रही है, तो कहीं इमारत को संभालने के लिए क्रेन तक बुलानी पड़ रही है। सेक्टर-31 में चार मंजिला मकान झुकने की ताजा घटना ने एक बार फिर शहर में निर्माण कार्यों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

शुक्रवार को सेक्टर-31 में मकान नंबर 769 के साथ लगते खाली प्लॉट में जेसीबी से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान पास की चार मंजिला इमारत में दरारें दिखाई देने लगीं। हालात बिगड़े तो इमारत करीब ढाई इंच तक झुक गई। दीवारों के अलावा पिलर में भी दरारें आने की बात सामने आई है।

मकान में रहने वाले लोगों को जैसे ही खतरे का अंदेशा हुआ, उन्होंने बाहर निकलकर खुदाई का काम रुकवाया और पुलिस को सूचना दी। पुलिस प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर आसपास के घरों को खाली करवाया। जानकारी के मुताबिक, दो मकानों में रहने वाले चार परिवारों को दूसरी जगह भेजा गया है। इमारत को और झुकने से रोकने के लिए पहले बांस की बल्लियों का सहारा लिया गया। बाद में क्रेन मंगवाकर अतिरिक्त इंतजाम किए गए। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता इमारत के आसपास रहने वाले लोगों को सुरक्षित रखना है।

लेकिन सवाल यह है कि क्या इस तरह की घटनाओं को केवल हादसा मानकर कार्रवाई करना काफी है? खुदाई शुरू होने से पहले क्या आसपास के मकानों की नींव और उनकी सुरक्षा का आकलन किया जाता है? अगर एक प्लॉट पर निर्माण का काम दूसरे मकान को खतरे में डाल देता है, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी तय होगी?

इन सवालों की अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है, क्योंकि पिछले सप्ताह सुशांत लोक फेज-1 के सी ब्लॉक में भी ऐसा ही मामला सामने आया था। वहां मकान नंबर 1770 झुक गया था। घटना के समय इमारत में करीब 40 मजदूर काम कर रहे थे। पुलिस ने आसपास के तीन मकानों से 12 परिवारों को सुरक्षित बाहर निकलवाया था।

उस मकान को बचाने के लिए दो क्रेन लगाई गईं, लेकिन इसके बावजूद 48 घंटे के भीतर इमारत करीब पांच इंच तक झुक गई। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। हालांकि, इमारत को गिराने या सुरक्षित रखने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएंगे, इस पर फैसला नहीं होने की बात सामने आई थी।

अब सेक्टर-31 की घटना ने प्रशासन के सामने एक और चुनौती खड़ी कर दी है। जरूरत सिर्फ हादसे के बाद लोगों को बाहर निकालने की नहीं, बल्कि खुदाई और निर्माण कार्यों के दौरान ऐसे इंतजाम सुनिश्चित करने की भी है, ताकि किसी परिवार को अपना घर अचानक छोड़ने की नौबत न आए।