Gurugram- गुरुग्राम के गांव रामगढ़ में गुर्जर समाज ने शादियों और अन्य सामाजिक आयोजनों में बढ़ते खर्च और दिखावे को कम करने के लिए अहम पहल की है। पंचायत में शादी-विवाह से जुड़ी कई रस्मों में लोगों की संख्या और लेनदेन की सीमा तय करने के साथ ही कई परंपराओं पर रोक लगाने का फैसला लिया गया। इन निर्णयों का उद्देश्य परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना और सामाजिक कुरीतियों को खत्म करना है।

गांव रामगढ़ में आयोजित इस पंचायत की अध्यक्षता सोहना विधायक तेजपाल तंवर ने की। बैठक में समाज की ओर से करीब दो दशक पहले लिए गए निर्णयों पर भी चर्चा हुई। इनमें गांव में डीजे बजाने पर लगाया गया प्रतिबंध शामिल है, जिसे पंचायत में दोहराते हुए सामाजिक अनुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।

पंचायत में शादी समारोहों को सीमित और व्यवस्थित बनाने के लिए अलग-अलग रस्मों में शामिल होने वाले लोगों की संख्या निर्धारित की गई। निर्णय के अनुसार, भात नातने में पांच लोग, भात भरने और लगन-सिक्का की रस्म में 21 लोग, मंडा झांकने में पांच लोग और बारात में अधिकतम 150 लोग शामिल हो सकेंगे। वहीं, शादी के खाने में अधिकतम 1200 लोगों के शामिल होने की सीमा तय की गई है।

शादी में होने वाले अनावश्यक खर्च को रोकने के लिए लेनदेन और रस्मों पर भी नियम बनाए गए हैं। जूता छिपाई की रस्म में अधिकतम 2100 रुपये देने का निर्णय लिया गया है, जबकि समधी-समधन के मान के रूप में 101 या 151 रुपये दिए जाएंगे। मंगलामुखियों को 1100 रुपये देने का फैसला किया गया है। इसके अलावा शादी के निमंत्रण के लिए छपे हुए कार्ड भेजने के बजाय केवल डिजिटल कार्ड की सॉफ्ट कॉपी भेजने पर सहमति बनी है।

पंचायत ने कुछ परंपराओं और आयोजनों में होने वाले खर्च पर पूरी तरह रोक लगाने का भी निर्णय लिया। इसमें गोद भराई और शादी-पार्टी में शराब परोसने के साथ खोया-पनीर के इस्तेमाल पर प्रतिबंध शामिल है। लड़कियों को बर्तन बांटने और मिठाई के डिब्बे देने की परंपरा पर भी रोक लगाने का फैसला किया गया है।

इसके अलावा किसी परिवार में मृत्यु होने पर भोज आयोजित करने पर रोक लगाने और शादी में केवल वर-वधू को ही गहने देने का निर्णय लिया गया। हथियारों और कपड़ों के लेनदेन को भी बंद करने पर सहमति बनी है। पंचायत का मानना है कि ऐसी परंपराओं के कारण परिवारों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़ता है और कई बार सामाजिक प्रतिस्पर्धा में लोग अपनी क्षमता से अधिक खर्च करने को मजबूर हो जाते हैं।

भाजपा किसान मोर्चा गुरुग्राम महानगर के महामंत्री धर्मेंद्र तंवर ने बताया कि समाज में फैली कुरीतियों को दूर करने और शादी-विवाह में होने वाले फिजूलखर्च को रोकने के उद्देश्य से ये निर्णय लिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इससे विशेष रूप से लड़की पक्ष पर पड़ने वाला अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम होगा और दिखावे के लिए किए जाने वाले खर्चों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।

रामगढ़ की इस पंचायत के फैसलों के जरिए समाज में सादगीपूर्ण विवाह और सीमित खर्च वाली परंपराओं को बढ़ावा देने का प्रयास किया गया है। अब इन निर्णयों को सामाजिक जीवन में लागू करना और लोगों को इनके प्रति जागरूक करना अहम होगा।