Gurugram- गुरुग्राम में बाल देखभाल संस्थानों में रह रहे बच्चों की निजता और सुरक्षा को लेकर हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने प्रदेश के सभी बाल देखभाल संस्थानों के लिए वैधानिक परामर्श जारी करते हुए सीसीटीवी कैमरों को निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप से जोड़ने पर प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, बच्चों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग को बिना अनुमति देखने, डाउनलोड करने या किसी दूसरे व्यक्ति के साथ साझा करने पर भी रोक लगाई गई है।

बच्चों की सुरक्षा के लिए लगाए गए सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग अब अनधिकृत लोगों तक नहीं पहुंच सकेगी। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने बाल देखभाल संस्थानों में सीसीटीवी व्यवस्था के इस्तेमाल को लेकर यह वैधानिक परामर्श जारी किया है। इसके तहत सीसीटीवी कैमरों और उनकी रिकॉर्डिंग पर संस्थान के प्रभारी का नियंत्रण रहेगा, जबकि रिकॉर्डिंग देखने की अनुमति केवल अधिकृत कर्मचारियों को होगी।

दरअसल, संस्थानों के निरीक्षण के दौरान आयोग की अध्यक्ष ने पाया कि कुछ स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों को निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप से जोड़ा गया था। इससे बच्चों की गतिविधियों की रिकॉर्डिंग अनधिकृत व्यक्तियों तक पहुंचने का खतरा बना रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए निजी उपकरणों के माध्यम से सीसीटीवी तक पहुंच पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

जारी परामर्श के अनुसार, बच्चों की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की तस्वीर लेना, उसे डाउनलोड करना या व्हाट्सऐप, सोशल मीडिया और ईमेल के जरिए साझा करना प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा शौचालय, स्नानघर और कपड़े बदलने वाले स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं लगाए जा सकेंगे। रिकॉर्डिंग से जुड़े उपकरणों और पासवर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं, किसी घटना से संबंधित रिकॉर्डिंग को कानूनी प्रक्रिया के लिए सुरक्षित रखना होगा।

आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने स्पष्ट किया है कि बाल देखभाल संस्थानों में सीसीटीवी व्यवस्था की जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाए कि रिकॉर्डिंग तक पहुंच केवल अधिकृत व्यक्तियों की हो और बच्चों की निजता की रक्षा के लिए सभी जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाए जाएं। निर्देशों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

आयोग का कहना है कि सीसीटीवी कैमरों का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि उनकी निजता को खतरे में डालना। ऐसे में निगरानी के साथ रिकॉर्डिंग की गोपनीयता बनाए रखना भी जरूरी है, ताकि बच्चों की गतिविधियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी किसी अनधिकृत व्यक्ति तक न पहुंचे।