गुरुग्राम में धूल प्रदूषण पर सख्ती, जोनवार अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
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Sahil Manchanda
Published on Oct 25, 2026 • 3 min read
गुरुग्राम में धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने जोनवार निगरानी के आदेश जारी किए हैं।
Gurugram- गुरुग्राम में बढ़ते धूल प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नगर निगम ने निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने का फैसला लिया है।निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने सीएक्यूएम यानी वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के सिटी एक्शन प्लान के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को अलग-अलग जोन की जिम्मेदारी सौंपी है। अधिकारियों को सड़कों के पुनर्विकास से लेकर धूल नियंत्रण के उपायों तक की निगरानी और सत्यापन करना होगा।
दरअसल, गुरुग्राम में वायु गुणवत्ता सुधारने और धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के उद्देश्य से नगर निगम ने यह कदम उठाया है। निगमायुक्त की ओर से जारी आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं।
जोन के हिसाब से अधिकारियों को मिली जिम्मेदारी
आदेश के मुताबिक, जोन-1 और जोन-2 की निगरानी खुद निगमायुक्त प्रदीप दहिया करेंगे। वहीं, अतिरिक्त निगमायुक्त अंकिता चौधरी को जोन-3 और जोन-4 की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अतिरिक्त निगमायुक्त यश जालुका जोन-5 और जोन-6 में निगरानी करेंगे। इसके अलावा, अतिरिक्त निगमायुक्त रविंद्र यादव को सभी जोन में हॉर्टिकल्चर यानी बागवानी से जुड़े कार्यों की समीक्षा और सत्यापन की जिम्मेदारी दी गई है।
सड़कों पर धूल रोकने के उपायों की होगी जांच
निगरानी के दौरान सीएक्यूएम सिटी एक्शन प्लान के तहत दोबारा विकसित की गई सड़कों का सत्यापन किया जाएगा। अधिकारी यह जांचेंगे कि सड़कों के पुनर्विकास से जुड़े कार्य किस स्थिति में हैं और धूल प्रदूषण को रोकने के लिए निर्धारित उपायों को किस तरह लागू किया गया है। इसके साथ ही, संबंधित सड़कों का विवरण, कार्यों की प्रगति और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर समीक्षा की जाएगी, ताकि धूल नियंत्रण से जुड़े उपायों की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
हॉर्टिकल्चर, तालाब और वर्षा जल संचयन पर भी नजर
नगर निगम की निगरानी केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी। अतिरिक्त निगमायुक्त रविंद्र यादव सभी जोन में हॉर्टिकल्चर संबंधी कार्यों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा, तालाबों के पुनरुद्धार और वर्षा जल संचयन से जुड़ी गतिविधियों की भी जांच की जाएगी। इन कार्यों से संबंधित आंकड़ों, प्रगति और उपलब्ध रिकॉर्ड का सत्यापन किया जाएगा।
इंजीनियरिंग अधिकारियों को भी निर्देश
निगमायुक्त ने चीफ इंजीनियर और संबंधित इंजीनियरिंग अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे निगरानी करने वाले अधिकारियों को जरूरी रिकॉर्ड, तकनीकी सहायता और अन्य आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराएं।संबंधित अधिकारियों को जोनवार आंकड़े और सड़कों से जुड़ी आवश्यक जानकारी भी उपलब्ध करानी होगी, जिससे निरीक्षण और समीक्षा की प्रक्रिया प्रभावी ढंग से पूरी की जा सके।
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