बैठक का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और औद्योगिक संगठनों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद स्थापित करना रहा। इस दौरान पर्यावरणीय नियमों की प्रभावी अनुपालना और उद्योगों से जुड़ी समस्याओं के समाधान को लेकर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी सीएक्यूएम और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड यानी सीपीसीबी की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुपालन की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने ईआरपी-III के क्रियान्वयन, एयर पॉल्यूशन कंट्रोल डिवाइसेज यानी एपीसीडी के अपग्रेडेशन, डीजल जनरेटर सेट से जुड़े मानकों, वेब कैमरों की स्थापना और लो-कॉस्ट सेंसर की तैनाती जैसे विषयों पर जानकारी दी।
इसके अलावा निर्माण एवं विध्वंस यानी सीएंडडी गतिविधियों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने के प्रभावी उपायों पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों ने औद्योगिक प्रतिनिधियों को प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों का नियमित रखरखाव करने और मॉनिटरिंग सिस्टम को सुचारू रूप से संचालित रखने के निर्देश दिए।
बैठक में औद्योगिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने संचालन और पर्यावरणीय नियमों की अनुपालना से जुड़ी अपनी समस्याएं और सुझाव भी अधिकारियों के सामने रखे। अधिकारियों ने संबंधित मुद्दों पर चर्चा करते हुए निर्धारित नियमों, समय-सीमा और अनुपालना सुनिश्चित करने को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश दिए।
बैठक के बाद एचएसपीसीबी की ओर से सीएक्यूएम के सूचना, शिक्षा एवं संचार यानी आईईसी कार्यक्रम के तहत सेमिनार और कार्यशाला का आयोजन भी किया गया। इसमें औद्योगिक प्रतिनिधियों को प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के उपायों के बारे में जानकारी दी गई।
कार्यशाला में डीजी सेट के मानकों, एपीसीडी की कार्यक्षमता, ऑनलाइन मॉनिटरिंग की आवश्यकताओं और एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। साथ ही सीएंडडी साइटों पर धूल नियंत्रण, प्रदूषण नियंत्रण उपकरणों के रखरखाव और मॉनिटरिंग उपकरणों की स्थापना एवं संचालन को लेकर भी जागरूक किया गया।
कार्यक्रम के अंत में सभी औद्योगिक इकाइयों और औद्योगिक संगठनों से पर्यावरणीय नियमों का जिम्मेदारी के साथ पालन करने और नियामक एजेंसियों को पूरा सहयोग देने की अपील की गई। एचएसपीसीबी ने स्पष्ट किया कि गुरुग्राम और पूरे एनसीआर में वायु प्रदूषण को कम करने तथा वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए उद्योगों और नियामक एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय बेहद जरूरी है।






