गुरुग्राम में भारी बारिश के बाद हुए जलभराव ने एक बार फिर शहर की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए। इसी बीच Cars24 की ओर से जलभराव वाली सड़क पर नाव उतारने का मामला सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो गया। कंपनी ने नाव के जरिए जलभराव में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का दावा किया, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में सोशल मीडिया पर किए गए एक दावे ने विवाद खड़ा कर दिया।

दरअसल, पिछले दिनों गुरुग्राम में हुई मूसलाधार बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में भारी जलभराव देखने को मिला। कई जगहों पर सड़कें पानी में डूब गईं और वाहन चालकों के साथ-साथ पैदल राहगीरों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।इसी दौरान पुरानी गाड़ियों की खरीद-बिक्री से जुड़ी कंपनी Cars24 की ओर से एक नीले रंग की नाव उतारी गई। कंपनी की वरिष्ठ अधिकारी प्राची शर्मा की ओर से नाव का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की गईं।वीडियो में नाव को जलभराव वाली सड़क पर चलते हुए दिखाया गया। कंपनी की ओर से दावा किया गया कि जलभराव में फंसे लोगों को नाव के जरिए सुरक्षित स्थानों और उनके घरों तक पहुंचाने में मदद की गई।
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प्रशासनिक व्यवस्था पर किया गया कटाक्ष

नाव चलाने के साथ ही सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए शहर में हुए जलभराव को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी कटाक्ष किया गया। पोस्ट में कहा गया कि जब सड़क पर कमर तक पानी भर जाए और गाड़ियां बंद हो जाएं, तो राहगीरों के लिए नाव ही एकमात्र सहारा बचती है।Cars24 की इस पहल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। बड़ी संख्या में लोगों ने पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। कुछ लोगों ने कंपनी के इस कदम की सराहना की तो कई लोगों ने इसे गुरुग्राम की जलनिकासी व्यवस्था पर सवाल उठाने का जरिया बनाया।मामला तब और ज्यादा चर्चा में आ गया, जब सोमवार को शेयर की गई सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया कि जलभराव वाली सड़क पर नाव चलाने के मामले में कंपनी पर 50 हजार रुपये का चालान लगाया गया है।पोस्ट तेजी से वायरल हुई। बड़ी संख्या में लोगों ने इसे लाइक और शेयर किया और कई यूजर्स ने जलभराव को लेकर गुरुग्राम प्रशासन और पुलिस पर सवाल भी उठाए। सोशल मीडिया पर लोगों ने शहर में जलनिकासी व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई।
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पुलिस-प्रशासन तक पहुंचा मामला

सोशल मीडिया पर मामला तेजी से फैलने के बाद इसकी जानकारी गुरुग्राम पुलिस और प्रशासन तक पहुंची। इसके बाद पुलिस-प्रशासन की ओर से स्पष्ट किया गया कि Cars24 पर 50 हजार रुपये का कोई चालान नहीं किया गया है।
प्रशासन के अनुसार, जलभराव के दौरान नाव चलाए जाने से संबंधित परिस्थितियों को लेकर सुरक्षा का मुद्दा जरूर सामने आया था, लेकिन कंपनी पर 50 हजार रुपये की पेनल्टी लगाए जाने का दावा सही नहीं था।यानी सोशल मीडिया पर जिस 50 हजार रुपये के चालान को लेकर चर्चा शुरू हुई थी, वह वास्तविकता में चालान नहीं था।
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कंपनी ने पोस्ट एडिट कर दी सफाई

पुलिस और प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने के बाद मंगलवार को कंपनी की ओर से सोशल मीडिया पोस्ट को एडिट किया गया।
Cars24 ने सफाई देते हुए स्पष्ट किया कि 50 हजार रुपये का चालान नहीं काटा गया था। बल्कि नाव तैयार करने में करीब 50 हजार रुपये का खर्च आया था।कंपनी की ओर से यह भी माना गया कि सोशल मीडिया पोस्ट में गलत जानकारी साझा होने से गुरुग्राम प्रशासन और पुलिस की छवि प्रभावित हुई। इसके लिए कंपनी ने प्रशासन और पुलिस से माफी मांगी।
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मदद, प्रचार या प्रशासन पर कटाक्ष? उठे सवाल

Cars24 की नाव को लेकर अब सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक पक्ष का कहना है कि जलभराव में फंसे लोगों की मदद के लिए नाव उतारना एक अच्छी पहल थी। वहीं, दूसरा पक्ष इसे कंपनी के प्रचार और प्रशासन पर कटाक्ष से जोड़कर देख रहा है।सबसे बड़ा विवाद हालांकि नाव चलाने को लेकर नहीं, बल्कि 50 हजार रुपये के कथित चालान को लेकर रहा। कंपनी की ओर से बाद में खुद स्पष्ट किया गया कि यह रकम चालान की नहीं, बल्कि नाव तैयार करने में हुए खर्च की थी।

फिलहाल कंपनी ने कथित 50 हजार रुपये के चालान की बात को गलत बताते हुए स्पष्टीकरण दे दिया है और प्रशासन-पुलिस से माफी भी मांग ली है। लेकिन इस पूरे मामले ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर हर साल बारिश में गुरुग्राम की सड़कों पर पानी भरने की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?