GMDA का दावा,केवल 7 स्थान पर जलभराव की समस्या

जीएमडीए का दावा है कि ड्रेनेज नेटवर्क में सुधार, नई स्टॉर्म वाटर लाइन, नालों की सफाई और मॉनिटरिंग के चलते जलभराव वाले स्थान 90 से घटकर सिर्फ 7 रह गए ह
Gurugram- शहर मानसून में जलभराव की समस्या से जूझने वाले गुरुग्राम के लिए इस बार राहत भरी खबर सामने आई है। जीएमडीए का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में किए गए ड्रेनेज सुधार कार्यों का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। वर्ष 2019 में जहां शहर में करीब 90 जलभराव वाले स्थान चिन्हित थे, वहीं इस मानसून में इनकी संख्या घटकर सिर्फ 7 रह गई है। जीएमडीए का कहना है कि नई ड्रेनेज लाइन, मास्टर ड्रेनों की सफाई, रोड इनलेट निर्माण और लगातार मॉनिटरिंग की वजह से जल निकासी व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है।
जीएमडीए के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पी.सी. मीणा ने बताया कि स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत करने, नियमित सफाई और फील्ड स्तर पर बेहतर तैयारियों के कारण शहर में जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी आई है। फिलहाल केवल सात स्थान—नरसिंहपुर, खांडसा चौक, ज्वाला मिल रोड, सेक्टर-28 चक्करपुर, लक्ष्मण विहार, शीतला माता रोड और कृष्णा चौक—ऐसे हैं जहां स्थायी समाधान के लिए काम जारी है।उन्होंने कहा कि जीएमडीए ने शहरी बाढ़ प्रबंधन के लिए दीर्घकालिक रणनीति अपनाई है, जिसमें नई ड्रेनेज इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ-साथ नियमित रखरखाव और निगरानी पर विशेष ध्यान दिया गया है। हाल ही में हुई बारिश के दौरान इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिले।
जीएमडीए ने 13 किलोमीटर से अधिक नई स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज लाइन विकसित की है। इसके तहत सदर्न पेरिफेरल रोड यानी एसपीआर पर वाटिका चौक से एनएच-48 तक मास्टर कैरियर ड्रेन लेग-4 का निर्माण किया गया। वहीं नरसिंहपुर में लेग-3 बादशाहपुर ड्रेन से 700 मीटर लंबा नया स्टॉर्म वाटर ड्रेन जोड़ा गया। ताऊ देवी लाल स्टेडियम परिसर के अंदर भी नई ड्रेन बनाई गई है।इन तीनों परियोजनाओं को मानसून शुरू होने से पहले चालू कर दिया गया, जिससे एसपीआर, मेदांता रोड, नरसिंहपुर और राजीव चौक जैसे इलाकों में बारिश का पानी पहले की तुलना में तेजी से निकला और जलभराव की स्थिति में काफी सुधार हुआ।
जल निकासी व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए जीएमडीए ने 70.56 किलोमीटर से अधिक मास्टर ड्रेनों की गाद निकालकर सफाई की है। इसके अलावा 60 किलोमीटर से ज्यादा सतही नालों की भी सफाई कर उनकी जल वहन क्षमता बढ़ाई गई है।पूरे शहर में 1,500 से अधिक नए रोड गली इनलेट बनाए गए हैं, जिससे बारिश का पानी तेजी से ड्रेनेज सिस्टम तक पहुंच रहा है। लगभग 45 किलोमीटर लंबी ग्रीन बेल्ट से मलबा और कचरा हटाया गया है, जबकि 35 किलोमीटर से अधिक ग्रीन बेल्ट को ग्रीन ड्रेन के रूप में विकसित किया गया है, जिससे वर्षा जल की निकासी के साथ भूजल रिचार्ज में भी मदद मिलेगी।
भविष्य की जरूरतों को देखते हुए जीएमडीए आईआईटी दिल्ली के तकनीकी सहयोग से सेक्टर-31, सेक्टर-39 और एआईटी चौक के पास आधुनिक जल संचयन संरचनाएं भी विकसित कर रहा है। इनका उद्देश्य वर्षा जल का संग्रहण, भूजल रिचार्ज और सतही जल बहाव को बेहतर बनाना है, ताकि शहरी बाढ़ प्रबंधन और अधिक प्रभावी हो सके।
मानसून के दौरान त्वरित जल निकासी के लिए शहर के संवेदनशील इलाकों में 34 से अधिक सबमर्सिबल पंप भी तैनात किए गए हैं। हीरो होंडा चौक से नरसिंहपुर तक एनएच-48 पर चार पंप लगाए गए हैं, जबकि खांडसा चौक, मेदांता रोड, शीतला माता रोड समेत अन्य जलभराव संभावित क्षेत्रों में भी पंप सेट सक्रिय हैं।
जीएमडीए ने यह भी बताया कि सोहना रोड पर जलभराव की स्थायी समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और नगर निगम गुरुग्राम के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। एजेंसियां संयुक्त रूप से स्थायी इंजीनियरिंग समाधान लागू करने की दिशा में काम कर रही हैं।
जीएमडीए का कहना है कि वैज्ञानिक योजना, समयबद्ध इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और लगातार निगरानी के जरिए गुरुग्राम के ड्रेनेज नेटवर्क को और मजबूत बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में भारी बारिश के दौरान भी शहर में जलभराव की समस्या न्यूनतम रहे और लोगों को बेहतर आवागमन की सुविधा मिल सके।
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