Gurugram- गुरुग्राम में सड़कों और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े विकास कार्यों की गुणवत्ता और सुरक्षा को लेकर जीएमडीए के सीईओ पीसी मीणा ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। इंजीनियरिंग विंग के अधिकारियों के साथ विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान उन्होंने कहा कि भविष्य में बनने वाली हर नई सड़क, सरफेस ड्रेन, मेनहोल सहित सभी प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर की जीआईएस टैगिंग करवाई जाए, ताकि हर कार्य की सटीक लोकेशन और उसकी स्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहे। इससे भविष्य में मेनहोल और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर को तलाशने में भी आसानी होगी।

गुणवत्ता को लेकर सीईओ ने स्पष्ट किया कि अब किसी भी बड़े प्रोजेक्ट का पूरा काम एक साथ आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। सबसे पहले 100 से 200 मीटर का काम पूरा कर अधिकारियों को दिखाना होगा। इसके बाद काम की गुणवत्ता और डिजाइन की जांच की जाएगी और सब कुछ सही पाए जाने के बाद ही बाकी प्रोजेक्ट का काम आगे बढ़ेगा। जीएमडीए का यह कदम निर्माण कार्यों में शुरुआती स्तर पर ही खामियों को पहचानकर उन्हें दूर करने और प्रोजेक्ट की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

वहीं, सड़क सुरक्षा को लेकर भी सीईओ ने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए हैं। सभी जर्सी बैरियरों की मरम्मत और पेंटिंग कराने के साथ उन पर रेडियंट यानी रिफ्लेक्टिव पट्टियां लगाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि रात के समय वाहन चालकों को बैरियर दूर से ही दिखाई दे सकें। दुर्घटना संभावित स्थानों पर बने ट्रैफिक नोज की मरम्मत कराने और वहां रिफ्लेक्टर लगाने को भी कहा गया है। सीईओ ने कहा कि इस तरह के छोटे लेकिन जरूरी सुधार सड़क हादसों को कम करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

गुरुग्राम में हरियाली बढ़ाने के लिए भी जीएमडीए ने समयसीमा तय की है। जीएमडीए क्षेत्र की ग्रीन बेल्ट में पौधारोपण का काम नवंबर से पहले पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही लगाए गए पौधों के संरक्षण और नियमित देखभाल की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। शहर में खराब पड़े फुटपाथों को लेकर भी अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि उन्हें दुरुस्त कर पैदल यात्रियों के चलने योग्य बनाया जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित और सुविधाजनक पैदल मार्ग मिल सके।

गुरुग्राम में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए उपलब्ध झीलों और तालाबों की क्षमता बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। अधिकारियों को वजीराबाद और घाटा गांव की झीलों की क्षमता बढ़ाने की संभावनाएं तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा नए जलाशय विकसित करने के लिए उपयुक्त स्थानों को चिह्नित करने को कहा गया है। इसका उद्देश्य बारिश के पानी को शहर से बाहर निकालने के बजाय अधिक से अधिक पानी को शहर में ही रोकना है, जिससे जलभराव कम करने के साथ-साथ भूजल रिचार्ज को भी बढ़ावा मिल सके।

समीक्षा बैठक में अधिकारियों ने अदालत में लंबित मामलों के कारण प्रभावित हो रहे कई विकास कार्यों की जानकारी भी दी। अधिकारियों के मुताबिक द्वारका एक्सप्रेसवे की सर्विस रोड का करीब 220 मीटर हिस्सा, रामपुरा रोड का कुछ हिस्सा और मल्टी यूटिलिटी कॉरिडोर रोड का करीब 600 मीटर हिस्सा न्यायालयी मामलों के कारण प्रभावित है। हालांकि मल्टी यूटिलिटी कॉरिडोर का करीब 85 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। इसके अलावा सेक्टर 73/74, 71/73, 72-72ए और 79-79ए में भी न्यायालयी मामलों के चलते काम प्रभावित हो रहा है। सीईओ पीसी मीणा ने एचएसवीपी के संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय कर इन मामलों की प्रभावी पैरवी करने और समाधान की दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं।
इस समीक्षा बैठक में इंफ्रा-1 के मुख्य अभियंता प्रवीन चौधरी, अधीक्षण अभियंता फैजल इब्राहिम, जेके सोरोत और प्रवीन कुमार, कार्यकारी अधिकारी अमित गोदारा, अभिनव वर्मा और राकेश कुमार सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। जीएमडीए के इन निर्देशों से साफ है कि गुरुग्राम में आने वाले समय में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की गुणवत्ता के साथ-साथ सड़क सुरक्षा, हरियाली और जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान पर भी विशेष फोकस रहेगा।





