
बारिश के बाद जलभराव को लेकर नगर निगम पर उठे सवालों के बीच इस प्रशासनिक फैसले की शहरभर में चर्चा रही। दूसरी ओर गुरुग्राम पुलिस ने पूरे दिन ट्रैफिक संचालन संभालने के बाद शाम को प्रेस वार्ता कर अपने इंतजामों की जानकारी साझा की। निरीक्षण की शुरुआत निगमायुक्त ने सेक्टर-10 स्थित अल्पाइन स्कूल रोड से की। स्थानीय लोगों ने बताया कि बीते वर्षों में हर बारिश के दौरान इस सड़क पर पानी भर जाने से लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। हालांकि इस बार ड्रेनेज व्यवस्था में किए गए सुधारों का असर स्पष्ट दिखाई दिया और सड़क पर जलभराव की समस्या नहीं हुई। क्षेत्र के लोगों ने नगर निगम और निगमायुक्त की पहल की सराहना की।

इसके बाद प्रदीप दहिया ने सेक्टर-10, बादशाहपुर ड्रेन, बहरामपुर रोड और आसपास के अन्य क्षेत्रों का निरीक्षण किया। बहरामपुर रोड, जहां पहले बारिश के समय पानी भरना आम बात थी, इस बार साफ-सुथरी दिखाई दी। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि सभी संवेदनशील स्थानों पर लगातार नजर रखी जाए और आवश्यकता पड़ने पर तुरंत संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

दौरे के दौरान शहर में स्थापित रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का भी निरीक्षण किया गया। साउथ सिटी-2 के आई-ब्लॉक, सेक्टर-4 स्थित स्वागत पार्क और शिवाजी नगर के राजकीय विद्यालय सहित कई स्थानों पर ये व्यवस्थाएं प्रभावी रूप से काम करती मिलीं। इन प्रणालियों से न केवल जलभराव में कमी आई है, बल्कि वर्षा जल के संचयन और भूजल रिचार्ज को भी बढ़ावा मिला है।

निगमायुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम का नियमित निरीक्षण और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए, ताकि मानसून के दौरान इनका अधिकतम लाभ मिल सके।प्रदीप दहिया ने कहा कि नगर निगम का उद्देश्य केवल बारिश का पानी निकालना नहीं, बल्कि जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान तैयार करना है। इसी सोच के साथ ड्रेनेज नेटवर्क को मजबूत किया जा रहा है, संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है और रेन वाटर हार्वेस्टिंग जैसी व्यवस्थाओं को प्राथमिकता दी जा रही है।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि जहां भी जलभराव की आशंका हो, वहां बिना देरी किए मशीनरी और अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
निगमायुक्त ने कहा कि ड्रेनेज व्यवस्था में किए गए सुधार और रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के सकारात्मक परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं। जल संरक्षण और मजबूत शहरी बुनियादी ढांचे के जरिए गुरुग्राम को सुरक्षित, टिकाऊ और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में नगर निगम लगातार कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि नागरिकों का सहयोग और विश्वास ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है।





