Gurugram- गुरुग्राम में सफाई व्यवस्था और नागरिकों की शिकायतों के निस्तारण में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की अब जवाबदेही तय होगी। नगर निगम गुरुग्राम की 24 घंटे चैलेंज मुहिम के तहत निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने अलग-अलग जोन के 215 मामलों की समीक्षा की। इस समीक्षा में केवल 2 मामलों में जुर्माना लगाया गया, जबकि 151 मामलों में जुर्माना लगाने से इनकार कर दिया गया। वहीं, 62 मामलों में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं।
दरअसल, नगर निगम ने नागरिकों की शिकायतों का समय पर समाधान सुनिश्चित करने और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने के लिए 24 घंटे चैलेंज मुहिम शुरू की है। इसके तहत शिकायतों पर मिलने वाले फीडबैक और सेवा स्तर समझौते यानी SLA के उल्लंघन की समीक्षा की जाती है। अगर किसी शिकायत पर नागरिकों की तरफ से प्रतिकूल फीडबैक मिलता है या तय समय सीमा के अनुसार काम नहीं होता, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाती है।
तीन दिन में देना होगा नोटिस का जवाब, वेतन रोकने का भी प्रावधान
नगर निगम ने इसके लिए एक मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP निर्धारित की है। इसके अनुसार, सबसे पहले संबंधित क्लस्टर हेड शिकायत और उसके फीडबैक की समीक्षा करेंगे। इसके बाद संबंधित जोन के अधिकारी या कर्मचारी को नोटिस जारी किया जाएगा और तीन दिन के भीतर जवाब मांगा जाएगा।
अधिकारी या कर्मचारी की ओर से दिए गए जवाब की समीक्षा के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इतना ही नहीं, शिकायत का संतोषजनक समाधान होने तक संबंधित अधिकारी या कर्मचारी का वेतन रोके जाने का भी प्रावधान रखा गया है। यानी अब शिकायतों के निस्तारण में देरी या लापरवाही होने पर विभागीय स्तर पर जवाब देना होगा।
किस जोन में कितने मामलों की हुई समीक्षा?
नगर निगम की समीक्षा में जोन-1 के 24 मामले शामिल किए गए। इनमें एक मामले में जुर्माना लगाया गया, 21 मामलों में जुर्माना अस्वीकार किया गया और दो मामलों में नोटिस जारी हुए।
जोन-2 में दो मामलों की समीक्षा हुई और दोनों में जुर्माना अस्वीकार किया गया। जोन-3 के 16 मामलों में एक मामले में जुर्माना लगाया गया, चार मामलों में जुर्माना अस्वीकार किया गया, जबकि 11 मामलों में नोटिस जारी किए गए।
वहीं, जोन-4 में सबसे ज्यादा मामलों में से 67 की समीक्षा हुई। इनमें 54 मामलों में जुर्माना अस्वीकार किया गया और 13 मामलों में नोटिस जारी किए गए। जोन-5 में 17 मामलों की समीक्षा के दौरान 13 में जुर्माना अस्वीकार किया गया, जबकि चार मामलों में नोटिस जारी हुए।
इसी तरह जोन-6 में सबसे ज्यादा 89 मामलों की समीक्षा की गई। इनमें 57 मामलों में जुर्माना अस्वीकार किया गया और 32 मामलों में संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए। इस तरह सभी छह जोन में कुल 215 मामलों की समीक्षा की गई, जिनमें दो मामलों में जुर्माना लगाया गया, 151 में जुर्माना अस्वीकार हुआ और 62 मामलों में नोटिस जारी किए गए।
इन इलाकों में सफाई और कचरा प्रबंधन बड़ी चुनौती
समीक्षा के दौरान नगर निगम ने शहर के कुछ ऐसे हॉटस्पॉट क्षेत्रों की भी पहचान की है, जहां सफाई व्यवस्था और कचरा प्रबंधन को लेकर विशेष निगरानी की जरूरत है। इनमें पालम विहार, सेक्टर-23, सेक्टर-45, सुशांत लोक-1, आरडी सिटी, सेक्टर-56 और सेक्टर-57 शामिल हैं।
निगम के अनुसार, इन इलाकों में खाली प्लॉटों का उचित रखरखाव नहीं होना भी कचरा जमा होने की एक बड़ी वजह है। खाली प्लॉटों में लोग कचरा डाल देते हैं, जिससे आसपास गंदगी फैलती है। ऐसे स्थानों पर नियमित निगरानी के साथ संबंधित लोगों और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया जा रहा है।
शिकायतों पर कार्रवाई के साथ जवाबदेही भी होगी तय
नगर निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने स्पष्ट किया है कि शिकायतों की समीक्षा, संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने और अंतिम निर्णय लेने के लिए SOP के तहत पूरी प्रक्रिया निर्धारित की गई है। इसका उद्देश्य केवल शिकायतों का निस्तारण करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि तय समय सीमा में नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिलें और लापरवाही बरतने वालों की जिम्मेदारी तय हो। अब देखना होगा कि 24 घंटे चैलेंज मुहिम और नई SOP के तहत नगर निगम की यह कार्रवाई शहर के सफाई प्रबंधन और शिकायतों के समाधान में कितना सुधार ला पाती है।






