
छज्जा गिरने के साथ फ्लैट की बाहरी दीवार भी क्षतिग्रस्त हो गई। तेज धमाके जैसी आवाज सुनकर आसपास के निवासी अपने घरों से बाहर निकल आए। मौके पर पहुंचकर लोगों ने देखा कि भारी मात्रा में कंक्रीट और प्लास्टर नीचे गिरा हुआ था।सबसे राहत की बात यह रही कि जिस समय यह हादसा हुआ, उस वक्त बालकनी के नीचे कोई व्यक्ति मौजूद नहीं था। अगर उस समय कोई वहां से गुजर रहा होता, तो बड़ा जानलेवा हादसा हो सकता था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित कर जांच शुरू कर दी।

हादसे के बाद सोसाइटी के निवासियों में भारी आक्रोश है। उनका आरोप है कि बिल्डर ने निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया, जिसकी वजह से अब लोग अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। रेजिडेंट्स का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाएं निर्माण की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।

निवासियों ने आशंका जताई है कि अगर समय रहते पूरे प्रोजेक्ट की जांच नहीं कराई गई, तो भविष्य में बड़ी दुर्घटना हो सकती है। लोगों ने मांग की है कि किसी स्वतंत्र और प्रतिष्ठित थर्ड-पार्टी एजेंसी से पूरे प्रोजेक्ट का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराया जाए और जब तक जांच पूरी नहीं होती, तब तक सभी टावरों की सुरक्षा का आकलन किया जाए।

गौरतलब है कि इससे पहले भी गुरुग्राम की कई बिल्डर सोसाइटियों में प्लास्टर और स्ट्रक्चर गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने विभिन्न सोसाइटियों के स्ट्रक्चरल ऑडिट के लिए टीमें गठित की थीं। हालांकि, इम्पीरिया एस्फेरा की इस ताजा घटना ने एक बार फिर निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, बिल्डरों की जवाबदेही और प्रशासनिक निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।






