
दरअसल एफडीए अधिकारियों को सूचना मिली थी कि गुरुग्राम में ब्लड प्रेशर की नकली दवाइयों की बिक्री की जा रही है। सूचना के आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर तीन ड्रग कंट्रोल अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित की गई। जांच के दौरान टीम ने सप्लाई चेन की पड़ताल की, जिसमें कई अहम तथ्य सामने आए।

जांच में पता चला कि 'श्री बालाजी फोरम' नाम से संचालित एक होलसेल ड्रग एजेंसी के माध्यम से गुरुग्राम में नकली दवाइयों की सप्लाई की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, संबंधित एजेंसी के पास दवाइयों के व्यापार के लिए आवश्यक वैध लाइसेंस भी नहीं था।

शुरुवाती पूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया कि नकली दवाइयों का निर्माण उत्तराखंड के रुड़की में किया जाता था। इसके बाद इन्हें लखनऊ के रास्ते हरियाणा और दिल्ली समेत विभिन्न क्षेत्रों में सप्लाई किया जाता था। अब एफडीए इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और नकली दवा बनाने वाली फैक्ट्री की पहचान में जुटा है।

अधिकारियों के अनुसार जब्त की गई नकली दवा ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने के लिए इस्तेमाल की जाती है। ऐसी दवा का सेवन करने से मरीज का ब्लड प्रेशर अनियंत्रित हो सकता है, जिससे हार्ट अटैक जैसी गंभीर स्थिति उत्पन्न होने का खतरा बढ़ जाता है।





