Gurugram- गुरुग्राम में रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन में लापरवाही का मामला सामने आने के बाद नगर निगम प्रशासन ने कार्रवाई शुरू कर दी है। मशीनों की हैंडिंग-टेकिंग प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं मिलने पर कार्यकारी अभियंता सुंदर श्योराण के खिलाफ मेजर पेनल्टी की कार्रवाई शुरू करने के लिए चार्जशीट जारी करने की सिफारिश की गई है। वहीं, मशीनों के रखरखाव और संचालन में कमियां मिलने पर संबंधित एजेंसियों से भी पेनल्टी और रिकवरी की जाएगी।
दरअसल, नगर निगम गुरुग्राम की मैकेनिकल रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन और रखरखाव से जुड़े दो अलग-अलग छह महीने के अनुबंधों में अनियमितताओं का मामला सामने आया है। निगम की ओर से 20 मशीनों के लिए 26 सितंबर 2026 और 5 मशीनों के लिए 12 अगस्त 2026 को कार्यादेश जारी किए गए थे। इस दौरान इन मशीनों की देखरेख और हैंडिंग-टेकिंग प्रक्रिया की जिम्मेदारी कार्यकारी अभियंता सुंदर श्योराण के पास थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने जांच की जिम्मेदारी अतिरिक्त निगमायुक्त यश जलुका को सौंपी थी। उन्होंने 27 अक्टूबर को मामले की जांच की और 28 अक्टूबर को अपनी रिपोर्ट निगम प्रशासन को सौंप दी। जांच रिपोर्ट में मशीनों की हैंडिंग-टेकिंग प्रक्रिया में कई खामियां सामने आईं। रिपोर्ट के मुताबिक, मशीनों और उनके कलपुर्जों की वास्तविक स्थिति का पर्याप्त तकनीकी सत्यापन नहीं किया गया था। इसके अलावा मशीनों की स्थिति से संबंधित जरूरी लिखित रिकॉर्ड और प्रमाणन भी उपलब्ध नहीं मिले।
जांच में यह भी सामने आया कि नगर निगम की संपत्तियों की सुरक्षा और उनकी जवाबदेही तय करने के लिए पर्याप्त निगरानी नहीं की गई। पूर्व एजेंसी जे.के. कॉन्ट्रैक्टर से मशीनों की मरम्मत पर खर्च हुई राशि की वसूली और अनुबंध के तहत पेनल्टी लगाने के संबंध में भी प्रभावी कार्रवाई का पर्याप्त रिकॉर्ड नहीं मिला।
इन्हीं अनियमितताओं को आधार बनाते हुए निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने 30 अक्टूबर 2026 को शहरी स्थानीय निकाय विभाग, हरियाणा के आयुक्त एवं सचिव को पत्र भेजकर कार्यकारी अभियंता सुंदर श्योराण के खिलाफ हरियाणा सिविल सेवा नियम 2016 के नियम-7 के तहत मेजर पेनल्टी कार्यवाही शुरू करने के लिए चार्जशीट जारी करने की सिफारिश की है।
वहीं, नई एजेंसी की जिम्मेदारी में भी खामियां सामने आई हैं। जांच के दौरान राधा कृष्ण सोसाइटी लिमिटेड की भूमिका की भी समीक्षा की गई। टेंडर की शर्तों के मुताबिक एजेंसी को बोली लगाने से पहले मशीनों का निरीक्षण करना था और उन्हें जैसी हैं, जहां हैं, उसी स्थिति में स्वीकार करना था।
इसके अलावा अनुबंध में बड़ी मरम्मत का काम सात दिनों के भीतर पूरा करने की शर्त भी रखी गई थी। लेकिन जांच रिपोर्ट में मशीनों के निरीक्षण, तकनीकी सत्यापन और उनमें मिली कमियों को समय पर दूर करने के मामले में भी खामियां दर्ज की गई हैं। इसके बाद निगमायुक्त ने दोनों अतिरिक्त निगमायुक्त-सह-क्लस्टर प्रमुखों को निर्देश दिए हैं कि संबंधित डिफॉल्टिंग एजेंसियों के खिलाफ अनुबंध की शर्तों और नियमों के अनुसार पेनल्टी लगाने की कार्रवाई शुरू की जाए।
रोड स्वीपिंग मशीनों के संचालन को लेकर भी सवाल उठे हैं। समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों में मशीनों के निर्धारित रूट पर नहीं चलने, कुछ मशीनों के खड़े रहने और सड़कों की सफाई के निर्धारित लक्ष्यों में कमी की बात सामने आई थी।
इन शिकायतों की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जांच रिपोर्ट में जीपीएस रिकॉर्ड, लॉगबुक और फील्ड निरीक्षण रिपोर्ट का सत्यापन करने की जरूरत बताई गई है। यानी अब मशीनें वास्तव में निर्धारित रूट पर चल रही हैं या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
निगमायुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि रोड स्वीपिंग मशीनें शहर में धूल नियंत्रण और सफाई व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनका नियमित संचालन, समय पर रखरखाव और अनुबंध की शर्तों का पालन जरूरी है। नगर निगम की संपत्तियों और सार्वजनिक संसाधनों के रखरखाव में किसी भी तरह की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच में सामने आई कमियों के आधार पर जवाबदेही तय की जा रही है और संबंधित एजेंसियों से भी अनुबंध के अनुसार पेनल्टी व आवश्यक रिकवरी कराई जाएगी।





