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गुरुग्राम में हरियाणा-यूके ट्रेड ब्रिज कार्यक्रम, सीएम नायब सिंह सैनी ने गिनाए निवेश के नए अवसर

SM

Sahil Manchanda

Published on Sep 14, 20266 min read

गुरुग्राम में हरियाणा-यूके ट्रेड ब्रिज कार्यक्रम, सीएम नायब सिंह सैनी ने गिनाए निवेश के नए अवसर
गुरुग्राम में सीएम सैनी ने कहा, CETA से हरियाणा के कारोबार को यूके बाजार में नए अवसर मिलेंगे।
Gurugram- गुरुग्राम में भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते यानी सीईटीए को लेकर ‘हरियाणा-यूके सीईटीए ट्रेड ब्रिज : अनलॉकिंग ग्लोबल अपॉर्च्युनिटीज फॉर हरियाणा’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि भारत-यूके सीईटीए हरियाणा के लिए वैश्विक व्यापार के नए अवसर खोलने वाला महत्वपूर्ण समझौता है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सीईटीए से हरियाणा के टेक्सटाइल, फुटवियर, रत्न एवं आभूषण और इंजीनियरिंग जैसे प्रमुख क्षेत्रों को यूके के बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी। साथ ही प्रदेश के युवाओं, किसानों, एमएसएमई और स्टार्टअप्स को वैश्विक निवेशकों और नई तकनीकों से जुड़ने के अवसर मिलेंगे।यूके हाई कमीशन के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में ब्रिटिश हाई कमीशन के प्रतिनिधि, उद्योग जगत से जुड़े लोग, निवेशक और अन्य साझेदार शामिल हुए।
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सीएम नायब सिंह सैनी ने कहा कि भारत और यूके के संबंध वर्षों पुरानी साझेदारी, लोकतांत्रिक मूल्यों, नवाचार और मजबूत जनसंपर्क पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसी लक्ष्य के साथ हरियाणा ने देश की अर्थव्यवस्था में एक ट्रिलियन डॉलर का योगदान देने का लक्ष्य रखा है
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मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 नवंबर को हरियाणा अपनी स्थापना के 60 वर्ष पूरे करने जा रहा है। इसी ऐतिहासिक अवसर के अगले वर्ष 5 से 7 अप्रैल 2027 तक ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027’ आयोजित किया जाएगा।उन्होंने बताया कि वर्ष 2016 में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 6 लाख 41 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव मिले थे। वहीं ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ के तहत मुंबई में 17 कंपनियों के साथ 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के एमओयू किए गए हैं।
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मुख्यमंत्री के मुताबिक ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2027 के लिए देश के सात प्रमुख शहरों के साथ-साथ जापान, दक्षिण कोरिया, दावोस, जर्मनी, यूके, ब्राजील, चिली और दुबई जैसे अंतरराष्ट्रीय आर्थिक केंद्रों में रोड शो आयोजित किए जाएंगे।उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, एआई, डेटा सेंटर, मेडिकल डिवाइस, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, एग्रीबिजनेस और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर जैसे भविष्य के उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार ने 10 क्षेत्र-विशिष्ट नीतियां लागू की हैं।
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राज्य सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक 5 लाख करोड़ रुपये का नया निवेश आकर्षित करना और 10 लाख से अधिक रोजगार पैदा करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन नीतियों की शुरुआत के पहले ही दिन 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपये के 110 एमओयू हुए, जिनमें 24 हजार 350 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश शामिल है।

एमएसएमई और निर्यात को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा ने 60 परिवर्तनकारी पहल की हैं। वर्ष 2019 में पहली एमएसएमई नीति लागू होने के बाद प्रदेश में 15 लाख से अधिक एमएसएमई का औपचारिक पंजीकरण हुआ है। अब ‘हरियाणा प्रोग्रेसिव एमएसएमई एवं एक्सपोर्ट प्रमोशन पॉलिसी-2026’ लाई गई है, जिसके तहत 55 हजार करोड़ रुपये से अधिक निवेश, 5 लाख से ज्यादा नए रोजगार और राज्य के निर्यात को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के सिर्फ 2 प्रतिशत भौगोलिक क्षेत्र में होने के बावजूद हरियाणा देश की गतिशील अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। गुरुग्राम को उन्होंने भारत के प्रमुख व्यावसायिक, तकनीकी और वैश्विक सेवा केंद्रों में से एक बताया।

उन्होंने कहा कि तेजी से बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ग्लोबल सप्लाई चेन को देखते हुए हरियाणा ने ‘गो ग्लोबल’ विजन अपनाया है। भारत-यूके सीईटीए इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वैश्विक निवेश और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए हरियाणा सरकार ने वर्ष 2020 में विदेश सहयोग विभाग का गठन किया था।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हरियाणा को भगवान श्रीकृष्ण की कर्मभूमि और गीता की धरती बताते हुए सभी वैश्विक साझेदारों को अंतरराष्ट्रीय गीता जयंती महोत्सव-2026 में शामिल होने का निमंत्रण भी दिया।

वहीं हरियाणा के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि हरियाणा-यूके ट्रेड ब्रिज दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, शिक्षा और सहयोग को मजबूत करने की दिशा में अहम पहल है। उन्होंने कहा कि सीईटीए से कारोबारियों, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों, स्टार्टअप्स, किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर खुलेंगे।

राव नरबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि निवेश, तकनीकी साझेदारी और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है। उन्होंने यूके के उद्योग जगत और निवेशकों से हरियाणा में निवेश करने का आह्वान करते हुए कहा— “कम टू हरियाणा, इन्वेस्ट इन हरियाणा, पार्टनर विद हरियाणा।”

कार्यक्रम में ब्रिटिश उप उच्चायुक्त अल्बा स्मेरिग्लियो ने कहा कि हरियाणा और यूके के बीच व्यापार, निवेश, नवाचार और शिक्षा के क्षेत्र में मजबूत संबंध हैं। उन्होंने कहा कि सीईटीए इन संबंधों को नई ऊंचाई देने का अवसर है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा की मैन्युफैक्चरिंग, कृषि, टेक्नोलॉजी और सेवा क्षेत्र की क्षमता तथा यूके की तकनीकी, वित्तीय, शिक्षा और अनुसंधान विशेषज्ञता एक-दूसरे की पूरक हैं। गुरुग्राम, मानेसर, फरीदाबाद और पानीपत जैसे औद्योगिक केंद्र यूके के साथ सहयोग के लिए व्यापक संभावनाएं रखते हैं।

हरियाणा के विदेश सहयोग विभाग में मुख्यमंत्री के एडवाइजर पवन चौधरी ने बताया कि 15 जुलाई को भारत-यूके सीईटीए लागू होने के बाद हरियाणा निर्यात ऑर्डर, निवेश और रोजगार के अवसरों को बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया कि हरियाणा करीब 154 अरब डॉलर की अर्थव्यवस्था है और लगभग 11 प्रतिशत की विकास दर से आगे बढ़ रहा है। राज्य का निर्यात वर्ष 2019-20 के करीब 12 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 19 अरब डॉलर हो गया है। वहीं प्रदेश में 12,271 स्टार्टअप पंजीकृत हैं।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने हरियाणा और यूके के व्यापार एवं औद्योगिक सहयोग से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों और उत्पादों की प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने कृषि उत्पादों, टेलीकॉम उपकरणों, इलेक्ट्रिक वाहनों और जेसीबी के उत्पादों की जानकारी ली। इस दौरान मुख्यमंत्री ने हरियाणा के विदेश सहयोग विभाग का आधिकारिक लोगो भी लॉन्च किया।

कार्यक्रम में हरियाणा में काम कर रही यूके की कंपनियों और संस्थानों ने भी अपने अनुभव साझा किए। एचएसबीसी के राघव हांडा, जेसीबी के सुनील खुराना, रेडियो डिजाइन के गौरव चौहान और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथैम्पटन के एलियोस फिलिप्स ने हरियाणा में अपने संस्थानों की यात्रा और कारोबार से जुड़े अनुभव बताए।

कार्यक्रम में भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के संयुक्त सचिव साकेत कुमार, पटौदी विधायक बिमला चौधरी, विदेश सहयोग विभाग के कमीश्नर एवं सेक्रेटरी अशोक मीणा, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव अजय कुमार, गुरुग्राम यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर प्रोफेसर संजय कौशिक, मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार राजीव जेटली, सीपी शिवास कविराज, नगर निगम गुरुग्राम आयुक्त प्रदीप दहिया, डीसी उत्तम सिंह सहित कई प्रशासनिक अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
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