Gurugram- मेदांता अस्पताल में भर्ती सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर सोनम वांगचुक ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर अनशन समाप्त करने के लिए अपनी तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं। साथ ही उन्होंने सरकार की पहल का स्वागत भी किया है।

मंगलवार देर शाम मेदांता अस्पताल लाए गए सोनम वांगचुक ने बुधवार को लिखे पत्र में बताया कि केंद्रीय मंत्रियों के साथ हुई मुलाकात सकारात्मक रही। उन्होंने सरकार द्वारा बातचीत की पहल करने पर आभार व्यक्त किया और कहा कि कुछ महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनने के बाद ही वह अपना अनशन समाप्त करेंगे।

अपने पत्र में सोनम वांगचुक ने पहली शर्त के तौर पर नीट परीक्षा पेपर लीक के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को उचित मुआवजा देने, मामले पर संसद में चर्चा कराने और जवाबदेही तय करने की मांग की। साथ ही उन्होंने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर भी विचार करने की बात कही।

दूसरी प्रमुख मांग में उन्होंने कहा कि 20 जुलाई के ‘चलो संसद’ मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई या उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल लोगों को किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़े।

सोनम वांगचुक ने पत्र में यह भी लिखा कि विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने उन्हें पत्र लिखकर देशहित में अनशन समाप्त करने का अनुरोध किया है। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह भी कई सांसदों के हस्ताक्षर वाला पत्र लेकर उनसे मिलने आए थे, जिसमें आंदोलन को आगे भी समर्थन देने का भरोसा दिया गया है।

उधर, मेदांता अस्पताल की ओर से जारी मेडिकल बुलेटिन के अनुसार सोनम वांगचुक की हालत फिलहाल स्थिर है। उनका ब्लड प्रेशर, पल्स रेट और अन्य जरूरी पैरामीटर सामान्य हैं। डॉक्टरों की टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है और उनकी सहमति से ही उपचार जारी है।

अब सबकी नजर सरकार और सोनम वांगचुक के बीच आगे होने वाली बातचीत पर टिकी है। यह देखना अहम होगा कि उनकी शर्तों पर क्या फैसला होता है और उनका अनशन कब समाप्त होता है।