गुरुग्राम में फ्लैट खरीदारों को बड़ी राहत, देरी पर बिल्डर को देना होगा ब्याज

गुरुग्राम के अंसल हाईलैंड पार्क प्रोजेक्ट में फ्लैट की पजेशन में देरी पर हरेरा ने डेवलपर को 10.80% सालाना ब्याज देने का आदेश दिया।
Gurugram- गुरुग्राम के सेक्टर-103 में फ्लैट की बुकिंग कराने वाले एक दंपती को कई साल से अपने घर का इंतजार है। तय समय पर फ्लैट नहीं मिला तो मामला हरेरा तक पहुंचा और अब अथॉरिटी ने डेवलपर के खिलाफ बड़ा आदेश जारी किया है।मामला अंसल हाईलैंड पार्क प्रोजेक्ट का है, जहां ब्रिटेन में रह रहे अनिल कुमार भारद्वाज और ललिता भारद्वाज ने फ्लैट लिया था। इस मामले में हरेरा गुरुग्राम ने आइडेंटिटी बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड को खरीदारों की रकम पर देरी का ब्याज चुकाने के निर्देश दिए हैं।
पूरे मामले की शुरुआत साल 2016 में हुई थी। दंपती ने उस समय सेक्टर-88ए स्थित अंसल्स अमांत्रे प्रोजेक्ट में अपना घर बुक कराया था। लेकिन जब वहां प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया, तो खरीदारों द्वारा पहले से जमा की गई 48 लाख रुपये से ज्यादा की रकम को साल 2019 में दूसरे प्रोजेक्ट यानी अंसल हाईलैंड पार्क में एडजस्ट कर दिया गया।इसके बाद दिसंबर 2019 में नए फ्लैट को लेकर समझौता हुआ। इसमें साफ तौर पर तय किया गया था कि खरीदारों को 30 नवंबर 2021 तक फ्लैट सौंप दिया जाएगा।
खरीदारों का आरोप है कि उन्होंने डेवलपर की तरफ से मांगी गई रकम समय-समय पर जमा की। करीब 18 लाख रुपये और दिए गए। यानी अपनी तरफ से भुगतान में कोई कमी नहीं छोड़ी गई। लेकिन बिल्डिंग का काम उस रफ्तार से नहीं हुआ, जिस हिसाब से पजेशन की तारीख तय की गई थी।नतीजा यह रहा कि पजेशन की तारीख निकल गई और साल दर साल गुजरते गए। इसके बावजूद न तो प्रोजेक्ट को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट मिला और न ही खरीदारों को घर का कब्जा लेने के लिए वैध ऑफर दिया गया।
दंपती ने एक और मुद्दा हरेरा के सामने उठाया। दिसंबर 2025 में मिले कस्टमर लेजर में उनके खाते में पांच लाख रुपये से ज्यादा की ब्याज राशि दिखाई गई थी।खरीदारों का कहना था कि इस रकम के बारे में उन्हें पहले कोई सूचना नहीं दी गई थी और न ही उनसे संबंधित कोई डिमांड लेटर साझा किया गया।मामले की सुनवाई के दौरान हरेरा ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रोजेक्ट से जुड़े हर पक्ष को इस देरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
एग्रो गोल्ड केमिकल्स इंडिया एलएलपी के पास परियोजना की कुछ जमीन थी। साल 2020 में हुए समझौते के तहत जमीन के बदले कंपनी को 18 फ्लैट मिलने थे। लेकिन हरेरा ने पाया कि इस कंपनी की भूमिका प्रोजेक्ट के प्रमोटर, डेवलपर या एजेंट की नहीं थी। इसलिए उसे इस मामले की जिम्मेदारी से अलग कर दिया गया।
दूसरी तरफ, अंसल हाउसिंग लिमिटेड को भी हरेरा ने जिम्मेदार नहीं माना। अथॉरिटी ने कहा कि खरीदारों का एग्रीमेंट अंसल हाउसिंग के साथ नहीं, बल्कि आइडेंटिटी बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड के साथ हुआ था। इसलिए खरीदारों को पजेशन देने और देरी की जिम्मेदारी भी उसी कंपनी की होगी।
डेवलपर ने यह तर्क भी दिया था कि शिकायत काफी देर से की गई है और मामले को एग्रीमेंट में लिखी शर्तों के हिसाब से ही देखा जाना चाहिए। लेकिन हरेरा ने इस दलील को खारिज कर दिया।अथॉरिटी ने कहा कि जब तक प्रोजेक्ट को ऑक्यूपेशन सर्टिफिकेट जारी नहीं हुआ है, तब तक इसे पूरा हुआ प्रोजेक्ट नहीं माना जा सकता। ऐसे में इस मामले में रेरा के प्रावधान लागू रहेंगे।
अब हरेरा ने डेवलपर को खरीदारों के पक्ष में 10.80 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज देने का आदेश दिया है।ब्याज की गणना उस तारीख से होगी, जिस दिन फ्लैट की पजेशन दी जानी थी। यानी 30 नवंबर 2021 से लेकर वैध पजेशन ऑफर या वास्तविक कब्जा मिलने तक ब्याज देना होगा।
इसके साथ ही अब तक जमा हुई ब्याज की बकाया रकम को 90 दिन के अंदर चुकाने के निर्देश दिए गए हैं। आगे जो ब्याज बनेगा, उसका भुगतान हर महीने की 10 तारीख तक करना होगा।फिलहाल हरेरा के इस फैसले से उन खरीदारों को बड़ी राहत मिली है, जो तय समय पर भुगतान करने के बावजूद वर्षों से अपने फ्लैट का इंतजार कर रहे थे।
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